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कभी खिलाड़ियों की दौड़, आम लोगों की चहल-पहल और बड़े नेताओं की जनसभाओं से गुलजार था वाईडी कॉलेज का मैदान, अब बदहाली में

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ऋषभ त्यागी

लखीमपुर खीरी। कभी सुबह की पहली किरण के साथ खिलाड़ियों की दौड़ और अभ्यास से गुलजार होने वाला और शाम होते ही आसपास के लोगों की चहल-पहल से जीवंत रहने वाला वाईडी कॉलेज का विशाल पिछला मैदान आज बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। जिस मैदान पर कभी क्रिकेट, फुटबॉल समेत तमाम खेलों के खिलाड़ी घंटों पसीना बहाते थे, वहीं सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग टहलने भी पहुंचते थे। कई स्थानीय खिलाड़ियों ने इसी मैदान पर अभ्यास कर जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया।


यह मैदान खेल गतिविधियों के साथ लखीमपुर की राजनीतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र रहा है। चुनावी दौर में यहां बड़े नेताओं की जनसभाएं हुआ करती थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव समेत कई बड़े नेताओं ने इसी मैदान से जनसभाओं को संबोधित किया। कभी मंच से नेताओं के भाषण और मैदान में उमड़ती भीड़ इसकी पहचान हुआ करते थे।

मैदान का जुड़ाव कॉलेज की छात्र राजनीति से भी रहा है। वाईडी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जिले की छात्र राजनीति में खास महत्व रखता था और पुराने लोगों के अनुसार अध्यक्ष को कभी-कभी शहर का ‘मिनी अध्यक्ष’ तक कहा जाता था। यहां की छात्र राजनीति से निकले कई लोग आगे चलकर नगर पालिका अध्यक्ष, विधायक और सांसद तक बने।

लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। मैदान में साफ-सफाई, समतलीकरण और जलनिकासी जैसी व्यवस्थाओं की कमी के चलते इसकी पुरानी रौनक गायब होती जा रही है। मैदान की पहचान रहा सौ वर्ष से अधिक पुराना विशाल आम का पेड़ भी करीब तीन दिन पहले गिर गया, लेकिन अब तक उसे हटाने तक की समुचित व्यवस्था नहीं हुई है। परिसर में स्थित छात्रसंघ भवन भी जर्जर हालत में है।

 

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स्थानीय लोगों और पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि जिस मैदान ने दशकों तक खिलाड़ियों को अभ्यास की जगह दी, शहरवासियों को सुबह-शाम घूमने का स्थान दिया और बड़े राजनीतिक आयोजनों की गवाही दी, उसे इस तरह उपेक्षित नहीं छोड़ा जाना चाहिए। लोगों ने मैदान के समुचित विकास, खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने और इसके पुराने स्वरूप को वापस लाने की मांग की है।

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